बीजिंग :भाषा: चीन ने अपने विवादित 50 अरब डॉलर वाले पाकिस्तान आथर्कि गलियारे में 4,000 मीटर उंची शिंगाई-तिब्बत पठार के लिएअपना दूसरा वैज्ञानिक अभियान भी शामिल किया है जिससे जलवायु में बदलाव, जैविक विविधता और पिछले दशको में पर्यावरण में हुए परिवर्तन का अध्ययन किया जाएगा।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर के मुताबिक यह अभियान वैज्ञानिकों को दक्षिण एशिया से जोड़ने वाले र्दा पर ले जाएगा। यह चीन पाकिस्तान आथर्कि गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से हो कर गुजरता है। इसे लेकर भारत ने चीन से अपनी नाराजगी जताई थी। इस क्षेत्र में सियाचीन ग्लेशियर के साथ ही कराकोरम पहाड़ी क्षेत्र भी शामिल है।

इससे पहले इसी तरह का अंतिम अभियान छिंगाई-तिब्बत पठार साल 1970 में किया गया था। इस समय यह अभियान पांच से 10 साल में समाप्त होगा और अभियान का पहला पड़ाव सर्लगि त्सो में होगा जो 2,391 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल की झील है। इसे साल 2014 में तिब्बत की सबसे बड़ी झील करार दिया गया है।

आने वाले महीनों में चीन की अकेडमी ऑफ साइंस :सीएस: 100 वैज्ञानिकों को झील क्षेत्र और चीन की सबसे बड़ी नदी के उद्गम क्षेत्र में यांगत्ज में भेजेगा।

सीएएस संस्थान के शिंगाई-तिब्बत पठार अनुसंधान के निदेशक ने कहा, पहले अभियान के बाद पठार के संसाधनों और पर्यावरण में बड़ा बदलाव हुआ है। हमें इन बदलावों से निपटने के लिए आगे अनुसंधान की जरूरत है। 

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