शिक्षामित्रों को 17 हजार रुपये मानदेय देने का आदेश निकला फर्जी, कार्रवाई के आदेश
उत्तर प्रदेश । समायोजित शिक्षा मित्रों को सुबह उस समय बहुत राहत मिली जब उन्हें 17 हजार रुपये के मानदेय देने का आदेश निकला लेकिन दोपहर होते-होते उनकी आशाएं ढह गईं क्योंकि ये आदेश फर्जी था। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने पत्र जारी कर इस आदेश को फर्जी करार देते हुए इसका संज्ञान न लेने के निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश के कई बेसिक शिक्षा अधिकारियों के पास यह आदेश पहुंचा। इस आदेश में लिखा था कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश के बाद समायोजित शिक्षामित्रों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार समायोजित शिक्षा मित्रों को 17 हजार रुपये मानदेय पर तैनात किया जाएगा। वहीं शिक्षामित्रों को उनकी मूल तैनाती वाले स्कूल में कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश थे। इसमें लिखा था कि यदि एक हफ्ते में शिक्षामित्र कार्यभार ग्रहण नहीं करेंगे तो उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी जाएंगी। इस आदेश के पहुंचते ही बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जिलों के अधिकारियों ने संपर्क किया। विभागीय अधिकारियों ने इसका संज्ञान लेते हुए तुंरत परिषद के सचिव को इस आदेश का खंडन करने और फर्जी आदेश के खिलाफ एफआईआर करने के निर्देश दिए। असमायोजित शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है और राज्य सरकार ने यही प्रस्ताव समायोजित शिक्षामित्रों के सामने रखा है कि वे टीईटी पास करने तक 10 हजार रुपये मानदेय पर काम करें।

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