गोला कोतवाली में एक महिला आरक्षी की गैरमौजूदगी में उसके कमरे में दो युवक और दो नाबालिग छात्राएं पकड़ी गईं।  पुलिस ने छात्राओं को छोड़ दिया है और युवकों को हिरासत में लेकर बैठा लिया गया है। पूरा दिन पुलिस मामले को छिपाने, बदलने और दबाने में लगी रही। शाम को पुलिस ने दोनों लड़कों को छेड़छाड़ के आरोप में जेल भेज दिया।  मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। पुलिस अफसर इस मामले में खामोश हैं।
गोला कोतवाली में तैनात रही एक महिला आरक्षी का तबादला दूसरे थाने में हो गया है। उसके नाम गोला कोतवाली परिसर में एक कमरा था। तबादले के बाद भी कमरा उसी आरक्षी के नाम पर रहा।  बुधवार की सुबह  महिला आरक्षी के कमरे से दो युवकों के साथ दो छात्राएं आपत्तिजनक स्थिति में देखी गईं। शिकायत मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंच दोनों युवकों और छात्राओं को पकड़ लिया। परिजनों के दबाव के बाद छात्राओं को छोड़ दिया गया है। दोनों छात्राएं शहर के एक इंटर कालेज में इंटर की छात्राएं बताई गई हैं। पकड़े गए दोनों युवकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस पूरा दिन मामले को छिपाने और बदलने में लगी रही। बाद में एक छात्रा के पिता से तहरीर लेकर पुलिस ने युवक मुस्तकीम अनवर निवासी मोहल्ला ऊंची भूड़ और आदिल खां निवासी मोहल्ला तीर्थ को छेड़छाड़ और पाक्सो एक्ट में जेल भेज दिया।
गोला पुलिस ने भले ही लिखा-पढ़ी में मामला छेड़छाड़ का दर्ज किया और पूरा घटनाक्रम भी बदल दिया। पुलिस ने मुकदमे में यह भी नहीं बताया कि ये लड़के कहां से पकड़े गए। पुलिस ने आला अफसरों को भी पूरे दिन गुमराह रखा। बताया जाता है कि जिस कमरे में युगल पकड़े गए, उसकी चाभी महिला आरक्षी के पास थी ही नहीं। आरक्षी इन दिनों अवकाश पर है। उसकी चाभी उसके पति के पास बताई जा रही है। फिर ये चाभी इन युवकों के पास कैसे आई? ये छात्राएं यहां कैसे लाई गईं, पुलिस की नाक के नीचे आखिर यह सब क्या चल रहा है, इन सवालों के जवाब से पुलिस बचती घूम रही है। पर इस घटना के बाद गोला पुलिस पर सवाल जरूर उठ गए हैं।
वैसे तो यह मामला ढका-छिपा रहता। लेकिन अपनोंं ने ही पोल खोल दी। बताते हैं कि महिला आरक्षी की गैर हाजिरी में जब चार लोग कमरे में थे तो एक पुलिस वाला ही वहां पहुंच गया। उसकी कमरे में पकड़े गए लोगों से कुछ बातचीत की। इसके बाद उसने राजफास कर दिया जिससे पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ गई।
इस मामले में गोला कोतवाल मधुकांत मिश्र का कहना है कि छात्राओं के परिजन कार्रवाई नहीं चाहते हैं जिस पर वह उच्चाधिकारियों के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। सीओ गोला अभिषेक प्रताप का कहना था कि वह सरकारी काम से कोर्ट आए हैं। वह कुछ बता नहीं सकते। उधर एएसपी घनश्याम चौरसिया ने घटना के बारे में पूछे जाने पर ताज्जुब जताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना के बारे में वह कुछ नहीं जानते।

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