अमेठी -   जिले में हर दिन कोई न कोई बड़ी वारदात पुलिस के रिकार्ड में जगह बना रही है. हत्या, लूट व डकैती अब अमेठी की नियति सी बनती जा रही है।  जिले में पुलिस की कमान सिर्फ़ एक अधिकारी सम्हाल हुये है जो रात दिन भागमभाग करते रहते हैं व्यवस्था सुधारने के लिये लेकिन व्यवस्था है कि पूँछ की तरह से टेढी ही रह जा रही है. हालात यह हो गए हैं कि आमजन का पुलिस से भरोसा ही खत्म होता जा रहा है। पुलिस के खिलाफ दो बार जनता का आक्रोश फूटा, जाम के साथ पुलिस मुर्दाबाद के नारे भी लगे। यह सब तब हो रहा है, जब योगी सरकार का सबसे अधिक जोर मंच से कानून-व्यवस्था सुधारने के लिये पुलिस अफ़सरो को दिया जाता है। खाकी की बेबसी की वजह सिस्टम में आई खामी बताई जा रही है। सब चुप हैं, क्योंकि बात अनुशासन की है। कुछ कहेंगे तो बता दिया जायेगा कि अनुशासन में रहकर बात करो.


पुलिस के खुलासे पर भी सवाल उठने लगे


गौरीगंज के अत्तानगर व सैठा में हुई डकैती की घटना की पुलिसिया खुलासे पर सवाल उठ रहे हैं तो जामों में हुए गोलीकांडों के अभियुक्त अब भी पकड़ से दूर हैं। ऐसा भी नहीं है कि पुलिस ने अपराध रोकने के लिए कुछ न किया हो। अभी पिछले माह अपराधों का ग्राफ रोकने के लिए बदमाशों की कुंडली तक थानावार बनवाई गई थी। लेकिन तमाम कवायद के बाद भी अपराधों का ग्राफ थमने के बजाय और बढ़ता ही जा रहा है। चुनौतियों के सामने बेबस पुलिस हर मोर्चे पर हारती ही दिख रही है।


हत्याओ की गिनती करे उंगलियों पर तो पायेन्गे कि 30 दिन में हुए छः कत्ल


अगस्त महीना जिले की पुलिस के लिहाज से बहुत ही बुरा रहा। वैसे तो इस माह जिले में हर दिन कोई न कोई वारदात हुई, लेकिन अकेले हत्याओं पर नजर डालें तो तीस दिन में छह लोगों का कत्ल कर दिया गया। गौरीगंज के अत्तानगर में डकैतों ने मेवालाल को मार डाला तो जामों के पर्वतपुर में युवक धर्मेन्द्र को गोलियों से भून दिया गया। इससे पहले जामों के बरेहटी में पूर्व प्रधान राम सिंह को गोली मार दी गई। बाजार शुकुल में स्वर्ण व्यवसाई अजय का लूट के बाद कत्ल कर दिया गया। मुंशीगंज में अधिवक्ता अनुराग के साथ एक अन्य घटना में एक युवक को मार दिया गया। जगदीशपुर में पत्रकार पर जानलेवा हमला हुआ। कमरौली में बुधवार की सुबह एक को गोली मार दी गई।


अपराधियो का अड्डा बनता जा रहा अमेठी का जामों थाना क्षेत्र


जिले का जामों थाना क्षेत्र जरायम का अड्डा बनता जा रहा है। खूनी सियायत के लिए जाना जाने वाला जामों एक बार फिर पुरानी राह पर है। पिछले कुछ महीनों से जामों में राजनैतिक प्रतिद्वंदियों को खत्म करने का सिलसिला सा चल निकला है और पुलिस इस खूनी सिलसिले को रोकने के बजाय लकीर पीटने में जुटी हुई है।


जनता का उठ रहा है भरोसा पुलिस से


जिस जनता की सुरक्षा का जिम्मा खाकी के ऊपर है। उसी को अपने रखवालों पर भरोसा नहीं रहा। सप्ताह भर में पुलिस के खिलाफ जनता दो बार सड़क पर उतर चुकी है। गौरीगंज शहर में सड़क हादसे के बाद गुस्सा फूटा तो अगले दिन अत्तानगर में हुई डकैती की घटना के चौबीस घंटे के बाद पुलिस की नाकामी पर लोगों में उबाल आया। इससे पहले बाजारशुकुल, जगदीशपुर, जामों, जायस व मोहनगंज में अवाम पुलिस के खिलाफ दो माह के अंदर कई बार सड़क पर आ चुकी है। बुधवार को एक बार फिर पुलिस के सामने वही सवाल कमरौली में भी खड़े हुए। पुलिस की लापरवाही से एक और जान चली गई। अब एक बार फिर सिस्टम लकीर पीटने की कवायद में जुट गया है।


अपर पुलिस अधीक्षक अमेठी की भी सुनिए


''सभी घटनाओं के पर्दाफाश के लिए टीमें लगाई गई हैं। जामों में आपराधिक घटनाओं को रोक पाने में नाकाम थानेदार को एसपी द्वारा निलंबित कर दिया गया है। डकैती की घटना का पर्दाफाश हो गया है। कमरौली की घटना में नामजद अभियुक्तों को पकड़ने के लिए पांच टीमें लगाई गई हैं। जल्द ही सभी घटनाओं का राजफाश होगा और अभियुक्त हमारी गिरफ्त में होंगे।''


बीसी दुबे


एएसपी, अमेठी

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