राज्य सरकार के द्वारा बाढ़ में घिरे लोगों को सुरक्षित निकाले जाने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. अब तक 6 लाख 25 हजार सात सौ अट्ठासी लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है और 1336 राहत शिविरों में 4 लाख 22 हजार एक सौ छह व्यक्ति शरण लिए हुए हैं.


बाढ़ में घिरे लोगों को सुरक्षित निकाले जाने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है.
पड़ोसी देश नेपाल और बिहार में लगातार हुई भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ से प्रदेश में अब तक 202 लोगों की मौत हो जाने के साथ बाढ़ से 18 जिलों की 1.21 लाख आबादी प्रभावित हुई है.
बाढ़ प्रभावित प्रदेश के 18 जिलों किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, समस्तीपुर, गोपालगंज, सारण, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगडिया में से सबसे अधिक 42 लोग अररिया में, सीतामढी में 31, पश्चिमी चंपारण में 29, सुपौल में 13, मधुबनी में 12, किशनगंज और पूर्वी चंपारण में 11, दरभंगा में 10, मधेपुरा और पूर्णिया में 9, कटिहार में 7, शिवहर, गोपालगंज, एवं सहरसा में 44, खगडिया में 3, सारण में 2, मुजफ्फरपुर में एक व्यक्ति की मौत हुई है.
राज्य सरकार के द्वारा बाढ़ में घिरे लोगों को सुरक्षित निकाले जाने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. अब तक 6 लाख 25 हजार सात सौ अट्ठासी लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है और 1336 राहत शिविरों में 4 लाख 22 हजार एक सौ छह व्यक्ति शरण लिए हुए हैं.
सामुदायिक रसोई घर के भरोसे 3 लाख से ज्यादा लोग
बाढ़ राहत शिविर के अतिरिक्त वैसे प्रभावित व्यक्ति जो राहत शिविरों में नहीं रह रहे हैं उनके लिए सामुदायिक रसोई घर चलाये जा रहे हैं. इस तरह कुल 1879 सामुदायिक रसोईघर चलाए जा रहे हैं
     

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