रितुराज राजावत: मुर्दों के कफ़न पर जीएसटी की मार
*- जीएसटी हुआ लागू जनता से लगाकर व्यापारियों तक ने जताया रोष*
*- रियल स्टेट और पेट्रोलियम को रखा गया इससे मुक्त व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों की अब होगी चांदी ही चांदी*
*- कपड़ों में लगेगा इसका कर कफन तक में वसूला जाएगा जीएसटी टैक्स*
*- कांग्रेस की सरकार में भाजपा ने किया था इस टैक्स का विरोध जनता और व्यापारियों की दी गयी थी दुहाई*
*- भाजपा को वोट देने वाले ठोंक रहें हैं अपना माथा अधिकांश की है राय झांसे वाली है ये सरकार*
:कांग्रेस सरकार को भृष्टाचारी बताने वाली भाजपा आज उसी सरकार की नीतियों को नए नए रूप देकर जनता के सामने साज सज्जा के साथ प्रस्तुत कर रही है । आधार से लगाकर जीएसटी का विरोध करने वाली भाजपा की राय अब बदल चुकी है । आधार और जीएसटी जैसी खून चूसने वाली नागफनी से अब भारतीय जनता को पूर्णरूप से बांधा जा चुका है । केंद्र सरकार द्वारा हर व्यक्ति के लिए आधार कार्ड महत्वपूर्ण कर दिया है । अब अगर आपके पास आधार नही है तो आपकी नागरिकता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया जा सकता है हालांकि सुप्रीमकोर्ट ने इसपर अपना निर्णय अगली सुनवाई तक सुरक्षित रखा है । कांग्रेस के जमाने में देश के व्यापारियों और जनता के लिए जीएसटी को घातक बनाने वाली सरकार ने कल रात 12 बजे घण्टा पीटकर इसको देश की जनता और मध्यमवर्गीय व्यवसाइयों के सर पर थोप दिया है । वहीं पेट्रोलिम और रियल स्टेट से जुड़े हुए बड़े बड़े व्यापारियों के प्रति केंद्र सरकार ने सहानभूति दिखाते हुए इससे उन्हें पूरी राहत प्रदान की है । सरकार के इस प्रकार की कार्यप्रणाली को देखकर इस बात का जरूर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार सिर्फ बड़े व्यवसाइयों के साथ सुर से सुर मिलाकर मिले सुर मेरा तुम्हारा गा रही है । लोकसभा चुनाव के पूर्व मध्यमवर्गीय व्यापारियों और जनता के प्रति खुद को हितैसी बतलाने वाली भाजपा आज की तारीख में उन्ही की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी है । इस नए कर के लगने के साथ ही व्यापारी बेहाल हो चुके है । व्यवसाइयों द्वारा पुराने खरीदे हुए माल को खुदरा मूल्य पर ही बेचने का प्राविधान है । व्यापारियों के पास अगर पिछला खरीदा हुआ स्टॉक रखा है तो उसे जीएसटी लागू होने के बाद या तो खुदरा मूल्य से अधिक में बेचा जाएगा या फिर खुदरा मूल्य में बेचकर व्यापारियों को जीएसटी टैक्स का फंदा अपने गले में पहनना उसकी मजबूरी होगी । कपड़ों को भी इस नए सिस्टम से अछूता नही रक्खा गया है और कफ़न पर भी ये टैक्स लगाया जा चुका है । अब गरीब जनता को अपने परिवार के सदस्यों को मरने के उपरांत बिना कफ़न के ही श्मसान तक ले जाना होगा । कब्रिस्तानों की कमी पड़ने वाली है क्योंकि जीएसटी के दायरे में अब लकड़ियां भी आ चुकीं हैं बहुत जल्द मरने वालों को जलाने की प्रथा गरीब परिवारों द्वारा खत्म की जा सकती है और लाशों को दफनाने की पद्धति को नया आयाम मिल सकता है । अच्छे दिनों की आस लेकर भाजपा को वोट देने वाले आज अपना माथा पकड़े बैठे हैं और भाजपा की बुद्धिजीवी कार्यकारणी वोट देने वालों की मंदबुद्धि का उपहास उड़ाने में व्यस्त है । जनता आज अपने आपको रजिया समझकर खुद को फंसा मान चुकी है अब अच्छे दिनों पर चर्चा गली गली नही की जाती है जो कि सरकार बनने के पहले की जाती थी । विदेशों में जमा काले धन के दर्शन अभी तक ना ही सरकार को हुए हैं और ना ही जनधन के खातों में अब तक 15 या 20 लाख सरकार बनने के इतने साल गुजर जाने के बाद पहुच सकें हैं । रही सही कसर आधार और जीएसटी रूपी कोढ़ ने पूरी कर दी है । जीती जागती गरीब जनता को जीएसटी का भार अपनी नँगी पीठ पर उठाना होगा और सांसे खत्म होने के उपरांत भी उन्हें इस टैक्स से निजात नही दी जायगी । बड़े व्यापारियों के हांथों में सरकार द्वारा चांदी का चम्मच पकड़ाया जा चुका है और मध्यमवर्गी व्यवसायी सन्नपात की स्थिति में सरकार की तरफ एकटुक नजरें गड़ाए सरकार के इस दुहाती भरे निर्णय पर आंसू बहा रहा है । दुख और वेदना का सागर गरीब के चेहरे पर साफ झलक रहा है जिसकी पीड़ा से उसे अभी जल्द निजात मिलती नही दिख रही है । जीएसटी को लेकर सभी के अपने अपने मत है भाजपाई इसे मील का पत्थर बता रहें हैं तो दूसरी तरफ व्यापारी और गरीब जनता इसे प्राणघातिका कह रही है । इसी को कहतें हैं मुर्दों के कफ़न पर जीएसटी की मार
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