अशोक श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ अमेठी

गौरीगंज : चकबंदी की प्रक्रिया किसानों को राहत देने के बजाय परेशानी का कारण बन गया है। वहीं तहसील प्रशासन भी मनमानी पर उतर आया है। जिसके चलते पीडितों ने मामले की शिकायत मुख्य मंत्री से किया है।

किसानों की सुविधाओं के लिए वेतन के रूप में मोटी रकम पाने वाले अफसर उन्ही की जेब काटने पर तुले हुए है। हालात यह हैकि जिलाधिकारी के कहने के बाद भी चकबंदी के अधिकारी चेतने को तैयार नहीं है। साहब के आदेश से ज्यादा जिम्मेदार अधिकारी के लिए लेखपाल का रसूख माने रखता है। पीडित पिछले तीन सालों से कचेहरी का चक्कर लगा रहा है। और दर्जनों बार डीएम से मामले की फरियाद भी कर चुका है। जिले गौरीगंज तहसील के गांव मंझवारा निवासी रामसेवक जिला मुख्यालय आते आते थक चुके है, लेकिन उनका काम जहां का तहां रुका पड़ा है। डीएम ने चकबंदी अधिकारी को दर्जनों बार पीड़ित की शिकायत के बाद कार्रवाई का आदेश दिया। लेकिन चकबंदी विभाग किसी भी आदेश को मानने को तैयार नही है। पीडित किसान को उसकी चक नही मिल पा रही है। वही तहसील के गांव अफोइया निवासी राधेश्याम ने मुख्य मंत्री को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। उसका कहना हैकि तहसील प्रशासन समस्या के निस्तारण के बजाय उसे ही जेल में डालने की धमकी दे रहा है। मामला यहां भी चकबंदी और तहसील प्रशासन से जुडा हुआ है। यह दो मामले महज बानगी भर है। जिले में अनगिनत किसान चकबंदी महकमे की मार से बेजार हो चले हैं। पैसा भी दिया और साहब की चाकरी भी की लेकिन बेचारे किसानों का काम नहीं हुआ। इस संबंध में जिलाधिकारी योगेश कुमार ने चकबंदी अधिकारी को मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया है। निस्तारण न होने पर तलब करने का निर्देश दिया है

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