रितुराज राजावत:चीन की शह पर पाक  फैलाता है भारत में आतंकवाद खुलेआम चीन देता है पाकिस्तान को समर्थन*
*- भारत के एनएसजी सदस्यता पर चीन ने जताया था खुला विरोध पाक को भी एनएसजी का सदस्य बनाने की मांग पर अड़ा दिखा था चीन*
*- 1962 में चीन भारत सीमा के मदभेद को लेकर लड़ा जा चुका है युद्ध भारत को करना पड़ा था हार का सामना*
*- शोशल मीडिया पर भरी जाती है चीन के विरोध की हुँकार सस्ता चीनी सामान ना खरीदने की कही जाती है बात*
*- चाइना से देश को बड़ा खतरा बताने वाले बाजार में शौक से खरीदतें हैं चाइना के बने प्रोडक्ट दूसरों को दी जाती है देशभक्ति की नसीहत चीन पर आजकल चर्चाओं का बाजार गर्म है । शोसल मीडिया से लगाकर समाचार पत्रों तक में चीन को विशेष स्थान दिया जा रहा है । भारत चीन से आपसी मदभेद भुलाकर नई दोस्ती का आगाज करना चाहता है । लेकिन पाकिस्तान की भक्ति भावना में लीन चाइना भारत की तरफ देखकर सीधे मुह बात करने को भी तैयार नही है । भारतीय प्रधानमंत्री भले ही चाइना के निरन्तर दौरे कर 1962 के युद्ध की कड़वी यादें दिलों से खत्म करने की पुरजोर कोशिश में लगे हुए हैं । वहीं पाकिस्तान के साथ हाँथ में हाथ डाले चीन किसी भी सूरत में भारत के साथ ये दोस्ती हम नही छोड़ेंगे वाली सरगम गाने को तैयार नही है । जीएसटी के साथ साथ चीन पर भी चर्चाएं आजकल जोरों पर है ज्यादातर लोगबाग चीन पर अलग अलग तरह की राय दें रहें हैं । शोशल मीडिया में क्रांतिकारी दौर की सुरुआत हो चुकी है चीन सहित उसके द्वारा बनाये जाने वाले सामान तक का विरोध किया जा रहा है । आतंकवाद से देश की जनता अब आजिज आ चुकी है पाकिस्तान सहित चीन को भी जनता द्वारा आतंकवाद का जनक कहा जाने लगा है । चीन द्वारा समय समय पर भारत के खिलाफ अपना विरोध पूर्व में व्यक्त किया जाता रहा है । एनएसजी की सदस्यता से लेकर भारत के द्वारा किये गए परमाणु परीक्षण तक का पुरजोर विरोध करने में चीन द्वारा कोई कोर कसर बांकी नही छोड़ी गई थी । 1962 में चीन भारत सीमा मदभेद को लेकर पहले भी चीन से युद्ध लड़ा जा चुका है जिसमें कूटनीति के पूर्ण ज्ञान ना होने की वजह से भारत को हार का मुंह देखना पड़ा था । आज हालात पूर्णरूप से बदल चुकें है 1962 के भारत से आज का भारत ठीक विपरीत और शसक्त स्थिति में खड़ा दिख रहा है । चाइना निर्मित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों ने अब भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बना ली है ज्यादत हिंदुस्तानी जनता चाइना के बने उपकरणों का अपने घरों में उपयोग करने लगी है । सस्ते मोबाइल से लगाकर दिवाली दसहरे में उपयोग होने वाली आतिशबाजी भी अब चाइना से बन कर आने लगी है । सस्ता होने की वजह से आम आदमी तक में इसकी पहुच आज बन चुकी है । हजारों करोड़ों का चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक सामान हर साल भारतीय नागरिकों द्वारा उपयोग किया जाने लगा है । जिससे ना केवल चीन की मुद्राफीसदी में ही बढ़ावा हो रहा है बल्कि पाकिस्तान को उसी कमाई से आतंकवाद फैलाने के प्रायोजन स्वरूप भारत से होने वाली कमाई का एक हिस्सा चीन द्वारा खुलेआम मुहाइया कराया जा रहा है । अज्ञानता की सेज में सोने वाली भारतीय जनता अब धीमे धीमे जाग रही है और चीन द्वारा लूटो और बर्बाद करो वाली नीति के वुरुद्ध अब नारे बुलन्द किये जाने लगे हैं । फेसबुक व्हाट्सएप्प ट्विटर सहित एसएमएस के द्वारा चीन के खिलाफ क्रांतिकारी संदेशों का आदान प्रदान किया जा रहा है । ज्यादातर हिंदुस्तानियों द्वारा चीन के बने सामान पर बैन लगाए जाने की मांग उठाई जाने लगी है । चाइनीज सामान का पुरजोर विरोध शोसली रूप से किया जा रहा है चीन से बने सामान को ना खरीदे जाने की नसीहत देना अब आम बात हो चुकी है । दूसरी तरफ सस्ते चीनी समान की मांग दिन ब दिन कम होने की जगह बढ़ती जा रही है । अति सस्ता होने के चलते घर की महिलाओं से लगाकर पुरुषों तक में ये सामान अपनी अलग पहचान बना चुकें हैं । गरीब जनता की आय सीमित हो चुकी है निश्चित आय पर अधिकांश जनता जीवन यापन करने पर मजबूर है । मेक इन इंडिया प्रोग्राम के फलीभूत ना होने के चलते भारत में अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक उपकरण विदेशों से आयात हो रहें हैं । अन्य किसी विदेशी उपकरण की तुलना में मेड इन चाइना सस्ता ही प्रतीत होता है । चाइना के सामान पर अपना विरोध दर्ज कराने वाले बाजारों में सस्ते सामान के चलते चाइना से निर्मित संसाधन खरीदनें पर विवश हैं । चाइना से देश को बड़ा खतरा बताने वाले भी चाइनीज वस्तुओं पर अपना जीवन यापन मजबूरीवश करने पर बेबस हैं । देशभक्ति फेसबुक तक सीमित हो चुकी है सस्ते चाइनीज सामान की तलाश में अच्छे अच्छे देशभक्त का दुकानों दुकानों की धूल फाँकते नजर आना कोई नई बात नही मानी जानी चाहिए । खरीददारी की बात आते ही देशभक्ति महंगी और चाइना का सामान सस्ता प्रतीत होता है । इसी को कहतें है कि देशभक्ति पर भारी सस्ती सुविधा की लाचारी

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