आज हामिद अंसारी को अल्प संख्यक याद आ गया।
सुरेश पटेल:- ऐसे ही वर्षो पहले भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रह चुके मोहम्द अजहरुद्दीन ने कहा था कि मैं अल्पसंख्यक हूँ इसलिए मेरे साथ भेदभाव हो रहा है। ऐसे ही पता नही ओर कितने उदाहरण मिल जायेंगे।ये देश जब इन लोगो को सबसे उच्च पदों पर बैठा देता है तब इन्हें क्या कुछ दिखाई नही देता। जब इनकी सोच कहाँ चली जाती जब कश्मीरी पंडितों को सरेआम काट दिया जाता है, रेल के डिब्बो को बंद करके हिन्दुओ को जलाया जाता है,पत्थर बाज सरे आम आतंकवादियों को बचाने के लिए उनकी मदद करते है।मैं पूछना चाहता हूँ कि ये कौन सी आज़ादी की बात करते है।ये कुछ भी बोले जैसे हम वंदेमातरम नही बोलेंगें, जिस देश में रहते है उसकी जय नही बोलेंगे, योग नही करेंगे आदि।ऐसी अनेक बाते है जिन पर इनको कुछ नही कहा जाता वे ही लोग आज अल्पसंख्यक की दुहाई देते है। शर्म आती है इनकी सोच पर।हिन्दुओ के बीच एक मुस्लिम अच्छी तरह खा कमा रहा है।मैं इन लोगो से पूछना चाहता हूं क्या एक मुस्लिम बहुल एरिया में एक हिन्दू अच्छी तरह जीवन व्यतीत कर सकता है?जवाब मुझे भी पता है और आप लोगो को भी। फिर कौन सा भेदभाव है जो इनके साथ हो रहा है।और कौन सी आज़ादी चाहिए इन्हें।हिन्दू हिंदुत्व की बात करे तो कट्टरता ओर ये कुछ भी बोले तो बेचारे भोले।भारत पाकिस्तान एक ही दिन आज़ाद हुए थे और 1971 में बांग्लादेश बना था भारत मे जहां मुस्लिम अल्पसंख्यक ओर इन दोनों देशों में हिन्दू अल्पसंख्यक । क्या कारण है कि यहां तो मुस्लिम मुस्लिम देशों से भी ज्यादा हो गए और उन देशों में हिन्दू लगभग खत्म हो गए।तब भी ये लोग बोलते है कि हमे चाहिए आज़ादी।तब ओर भी शर्म आती है जब कुछ नेता,बुध्दिजीवी, ओर पत्रकार भी इनका साथ देते है।एक बार जो भी भाई इस प्रवर्ति के है उन लोगो को एक बार पाकिस्तान जरूर जाना चाहिये। तब इन्हें पता चलेगा कि आजादी क्या होती है।मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि जितनी आज़ादी भारत में है उतनी संसार के किसी भी देश मे नही है

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