11 घंटे चली सर्जरी से जोड़ा गया कटा हाथ, सिरफिरे आशिक ने काटा था तलवार से पंजा
केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने लखीमपुर की लड़की के कलाई से कटे हाथ को बृहस्पतिवार को जोड़ दिया। इस पूरे ऑपरेशन में 11 घंटे से अधिक लगे। इस लड़की का हाथ एक शोहदे ने बुधवार को तलवार से काट दिया था। इसके बाद पुलिस ने कटे हुए हाथ को एक पन्नी में रखकर केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग पहुंचाया था।
सर्जरी के बाद लड़की को पोस्ट ऑपरेटिव आईसीयू में रखा गया है। जहां उसे लगभग एक सप्ताह तक निगरानी में रखा जाएगा। इसके बाद पता चलेगा कि सर्जरी में कितनी सफलता मिली है। बृहस्पतिवार शाम को 7 बजे मरीज को थर्ड फ्लोर पर ट्रॉमा वेंटीलेटर यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया।
प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एके सिंह ने बताया कि लखीमपुर निवासी लड़की का हाथ शोहदे ने लगभग दोपहर 2.30 बजे काटा था। तलवार के एक वार से ही हाथ कलाई से कटकर अलग हो गया था। खुद को बचाने के चक्कर उसके दूसरे हाथ में भी काफी चोटें आई थीं। पहले उसे लखीमपुर के जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां फर्स्ट एड देने के बाद उसे केजीएमयू के लिए रेफरकर दिया गया।
एंबुलेंस से रात को लगभग 9.15 बजे किशोरी केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंची जहां से उसे प्लास्टिक सर्जरी विभाग की इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया। डॉ. बृजेश मिश्रा ने बताया एक्स-रे आदि जांच के बाद रात को 10.30 बजे किशोरी का ऑपरेशन शुरू किया गया। इस सर्जरी में छह प्लास्टिक सर्जनों की टीम लगी।
डॉ. बृजेश मिश्र ने बताया कि किशोरी को बुरी तरह से तलवार से मारा गया था। इसके चलते उसका बायां हाथ पूरी तरह से कलाई से कटकर अलग हो गया था। वहीं दाहिने हाथ में कोहनी के पास से गंभीर रूप से कटा था। इसके अलावा हथेली के बीच के हिस्से के साथ तीसरी, चौथी, पांचवीं उंगली भी कटी हुई थी।
तलवार के वार से हाथ की नसों और नर्व को भी नुकसान पहुंचा था। किशोरी के सिर पर भी तलवार के दो गहरे घाव हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार रात को 10.30 बजे शुरू हुई सर्जरी बृहस्पतिवार सुबह लगभग 9.30 बजे खत्म हुई।
48 से 72 घंटे अहम
आमतौर पर कटे हुए अंगों को छह घंटे के अंदर जोड़ देना चाहिए। किशोरी का हाथ उनके पास लगभग 7-8 घंटे बाद पहुंचा था। इसलिए कम समय में सर्जरी करना बहुत जरूरी था।
इसलिए समय का सही प्रबंधन करते हुए सर्जरी को पूरा किया। बाएं हाथ की तीन उंगलियों में खून की आपूर्ति कम थी। इसलिए उन्हें भी खतरा है। 48 से 72 घंटे मरीज के लिए बेहद अहम हैं। बृहस्पतिवार शाम को सात बजे ट्रॉमा वेंटीलेटर यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया।
कलाई और हाथ के कटे हिस्से की सफाई की गई
तलवार के वार क्षतिग्रस्त हड्डियों, मांसपेशियों को हटाया गया
पहले कटी हड्डी को जोड़ा गया
इसके बाद मांसपेशियों, तंतुओं, नर्व जोड़ी गईं
हाथ में खून की आपूर्ति बनी रहे इसके लिए धमनियों और शिराओं को जोड़ा गया
इस टीम ने की सर्जरी
डॉ. बृजेश मिश्रा, डॉ. गुरु प्रसाद रेड्डी, डॉ. नवनीत शर्मा, एनेस्थेटिस्ट डॉ. सृष्टि, डॉ. अरुण, डॉ. भारतेश, डॉ. सुमित
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